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नात सरकार की पढ़ता हूँ मैं / Naat Sarkar Ki Padhta Hoon Main

Naat Sarkar Ki Parta Hoon Main Lyrics in Hindi & English ना'त सरकार की पढ़ता हूँ मैं बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी इक तेरा नाम वसीला है मेरा रंज-ओ-ग़म में भी इसी नाम से राहत होगी ना'त सरकार की पढ़ता हूँ मैं बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी उन को मुख़्तार बनाया है मेरे मौला ने ख़ुल्द में बस वही जा सकता है जिस को हसनैन के नाना की इजाज़त होगी ना'त सरकार की पढ़ता हूँ मैं बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी ये सुना है कि बहुत घोर-अँधेरी होगी क़ब्र का ख़ौफ़ न रखना, ऐ दिल ! वहाँ सरकार के चेहरे की ज़ियारत होगी ना'त सरकार की पढ़ता हूँ मैं बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी कभी यासीं, कभी ताहा, कभी वल्लैल आया जिस की क़समें मेरा रब खाता है कितनी दिलकश मेरे महबूब की सूरत होगी ना'त सरकार की पढ़ता हूँ मैं बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी हश्र का दिन भी 'अजब देखने वाला होगा ज़ुल्फ़ लहराते वो जब आएँगे फिर क़यामत पे भी इक और क़यामत होगी ना'त सरकार की पढ़ता हूँ मैं बस इसी बात से घर में मेरे रहमत होगी दो जहाँ में उसे फिर कौन पनाह में लेगा होगा रुस्वा...

हवा की ख़ुश्बू बता रही है वो ज़ुल्फ़ अपनी सजा रहे हैं / Hawa Ki Khushboo Bata Rahi Hai Wo Zulf Apni Saja Rahe Hain

हवा की ख़ुश्बू बता रही है, वो ज़ुल्फ़ अपनी सजा रहे हैं सवारी तयबा से चल पड़ी है, हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं नवाज़िशों पर नवाज़िशें हैं, 'इनायतों पर 'इनायतें हैं नबी की ना'तें सुना सुना कर हम अपनी क़िस्मत जगा रहे हैं कहीं पे रौनक़ है मय-कशों की, कहीं पे महफ़िल है दिल-जलों की ये कितने ख़ुश-बख़्त हैं जो अपने नबी की महफ़िल सजा रहे हैं न पास पी हो तो सूना सावन, वो जिस पे राज़ी वही सुहागन जिन्हों ने पकड़ा नबी का दामन, उन्हीं के घर जगमगा रहे हैं यहाँ पे लाखों सिकंदर आए, न बाँस बाक़ी न बाँसुरी है मगर हमारे नबी के झंडे अज़ल के दिन से खड़े हुए हैं कोई तो बोले जिसे ख़ुदा ने नहीं दिया है नबी का सदक़ा हमारे बच्चे तो मुस्तफ़ा के ही टुकड़े खा कर बड़े हुए हैं हबीब-ए-दावर, ग़रीब-परवर, रसूल-ए-अकरम, करम के पैकर किसी को दर पे बुला रहे हैं, किसी के ख़्वाबों में आ रहे हैं मैं अपने ख़ैर-उल-वरा के सदक़े, मैं उन की शान-ए-'अता के सदक़े भरा है 'ऐबों से मेरा दामन, हुज़ूर फिर भी निभा रहे हैं बनेगा जाने का फिर बहाना, कहेगा आ कर कोई दीवाना चलो, नियाज़ी ! तुम्हें मदीने, मदीने वाले बुला रहे हैं शायर: अब्दुल सत्...

मेरे आक़ा आओ कि मुद्दत हुई है / Mere Aaqa Aao Ke Muddat Hui Hai

मेरे आक़ा ! आओ कि मुद्दत हुई है तेरी राह में अखियाँ बिछाते बिछाते तेरी हसरतों में, तेरी चाहतों में बड़े दिन हुए घर सजाते सजाते मेरा है ये ईमाँ, ये मेरा यक़ीं है मेरे मुस्तफ़ा सा न कोई हसीं है कि रुख़ उन का देखा है जब से क़मर ने निकलता है मुँह को छुपाते छुपाते मेरे लब पे, मौला ! न कोई सदा है फ़क़त मुझ निकम्मे की ये ही दु'आ है मेरी साँस निकले दर-ए-मुस्तफ़ा पे ग़म-ए-दिल नबी को सुनाते सुनाते ये दिल जब से 'इश्क़-ए-नबी में पड़ा है न दिन की ख़बर है, न शब का पता है कि अब तो बसारत भी कम हो गई है तेरे ग़म में आँसू बहाते बहाते क़यामत का मंज़र बड़ा पुर-ख़तर है मगर मुस्तफ़ा का जो दीवाना होगा वो पुल से गुज़र जाएगा वज्द करते ये ना'रा नबी का लगाते लगाते ये माना कि इक दिन आनी क़ज़ा है मगर, दोस्तो ! तुम से ये इल्तिजा है कि शहर-ए-मुहम्मद की हर इक गली से जनाज़ा उठाना घुमाते घुमाते है का'बे की 'अज़मत भी अपनी जगह पर मगर दिल में, हाकिम ! तमन्ना यही है जो मिल जाए नक़्श-ए-कफ़-ए-पा-ए-अहमद तो मर जाऊँ सर को झुकाते झुकाते शायर: अहमद अली हाकिम ना'त-ख़्वाँ: शाहबाज़ क़मर फ़रीदी ज़ोहैब अशरफ़...

बेख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना / Bekhud Kiye Dete Hain Andaz-e-Hijabana

बे-ख़ुद किए देते हैं अंदाज़-ए-हिजाबाना आ दिल में तुझे रख लूँ, ऐ जल्वा-ए-जानाना ! इतना तो करम करना, ऐ चश्म-ए-करीमाना ! जब जान लबों पर हो, तुम सामने आ जाना क्यूँ आँख मिलाई थी, क्यूँ आग लगाई थी अब रुख़ को छुपा बैठे कर के मुझे दीवाना जी चाहता है तोहफ़े में भेजूँ मैं उन्हें आँखें दर्शन का तो दर्शन हो, नज़राने का नज़राना क्या लुत्फ़ हो महशर में, क़दमों में गिरूँ उन के सरकार कहें देखो, दीवाना है दीवाना ! क्या लुत्फ़ हो महशर में मैं शिकवे किए जाऊँ वो हँस के कहे जाएँ दीवाना है दीवाना मैं होश-ओ-हवास अपने इस बात पे खो बैठा जब तू ने कहा हँस के, आया मेरा दीवाना पीने को तो पी लूँगा, पर 'अर्ज़ ज़रा सी है अजमेर का साक़ी हो, बग़दाद का मय-ख़ाना बेदम ! मेरी क़िस्मत में चक्कर हैं इसी दर के छूटा है न छूटेगा मुझ से दर-ए-जानाना साक़ी तेरे आते ही ये जोश है मस्ती का शीशे पे गिरा शीशा, पैमाने पे पैमाना मा'लूम नहीं, बेदम ! मैं कौन हूँ और क्या हूँ यूँ अपनों में अपना हूँ, बेगानों में बेगाना शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी अमजद साबरी हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरी ...

लोगों को तो दुनिया में लाखों ही सहारे हैं | हम को यही काफ़ी है सरकार हमारे हैं / Logon Ko To Duniya Mein Lakhon Hi Sahare Hain | Hum Ko Yahi Kafi Hai Sarkar Hamare Hain

लोगों को तो दुनिया में लाखों ही सहारे हैं हम को यही काफ़ी है, सरकार हमारे हैं रख लेना भरम मेरा, महशर में, मेरे आक़ा ! कुछ भी हैं, मेरे आक़ा ! नौकर तो तुम्हारे हैं क़ुर्बान तेरी शान पर, हसनैन के नाना ! सदक़ा तेरे ना'लैन का मेरे भी गुज़ारे हैं पंजतन के घराने का जब से मैं हुआ नौकर उस वक़्त से फिर अपने वारे ही नियारे हैं उन पर हैं 'अयाँ 'ऐब मेरे, बस एक तसल्ली है सरकार हमारे हैं बस सरकार हमारे हैं रहते हैं सदा नूर की मानिंद मेरे दिल में वो दिन जो, ज़िया ! मैं ने तयबा में गुज़ारे हैं ना'त-ख़्वाँ: आज़म क़ादरी शहबाज़ क़मर फ़रीदी क़ारी शाहिद मेहमूद logo.n ko to duniya me.n laakho.n hi sahaare hai.n ham ko yahi kaafi hai, sarkaar hamaare hai.n rakh lena bharam mera, mehshar me.n, mere aaqa ! kuchh bhi hai.n, mere aaqa ! naukar to tumhaare hai.n qurbaan teri shaan par, hasnain ke naana ! sadqa tere naa'lain ka mere bhi guzaare hai.n panjtan ke gharaane ka jab se mai.n huaa naukar us waqt se phir apne waare hi niyaare hai.n un par hai 'ayaa.n ...

दर-ए-अक़्दस पे हाल-ए-दिल सुनाना याद आता है | मदीना याद आता है / Dar-e-Aqdas Pe Haal-e-Dil Sunana Yaad Aata Hai | Madina Yaad Aata Hai

दर-ए-अक़्दस पे हाल-ए-दिल सुनाना याद आता है मदीना याद आता है मदीने में जो गुज़रा वो ज़माना याद आता है मदीना याद आता है ख़ुदा के नूर के जल्वे जो देखे मैं ने तयबा में मुझे रह रह के वो मंज़र सुहाना याद आता है मदीना याद आता है अदब से बैठ कर उस गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में नबी की याद में आँसू बहाना याद आता है मदीना याद आता है रसूलुल्लाह के दरबार में, उन की मोहब्बत में वो मेरा रोज़-ओ-शब का आना-जाना याद आता है मदीना याद आता है ओवैस-ए-कर्न बोले, माँ ! इजाज़त दीजिए मुझ को जुदाई में तड़पता हूँ, मदीना याद आता है मदीना याद आता है मज़ार-ए-फ़ातिमा पे कर्बला वालों की याद आई मदीने वाले आक़ा का घराना याद आता है मदीना याद आता है नबी के ज़िक्र की महफ़िल में आते ही मुझे, मोहसिन ! मदीना याद आता था, मदीना याद आता है मदीना याद आता है ना'त-ख़्वाँ: यूसुफ़ मेमन शहबाज़ क़मर फ़रीदी मुहम्मद आज़म क़ादरी फ़रहान अली क़ादरी dar-e-aqdas pe haal-e-dil sunaana yaad aata hai madina aata hai madine me.n jo guzra wo zamaana yaad aata hai madina aata hai KHuda ke noor ke jalwe jo dekhe mai.n ne tay...

नसीबों को जगाया है अली ने / Naseebon Ko Jagaya Hai Ali Ne

नसीबों को जगाया है 'अली ने हमें अपना बनाया है 'अली ने वो ततहीरे वो 'इज़्ज़त बेटियों की बचाना ख़ुद सिखाया है 'अली ने मिटेगी मुस्तफ़ा की नस्ल कैसे कि जब शजरा चलाया है 'अली ने 'अली के नाम पर हम क्यूँ मरे ना हमें जीना सिखाया है 'अली ने ग़मों ने जब भी मुझ को आ के घेरा मुझे आ कर बचाया है 'अली ने गदा, शहबाज़ ! उन के दर का हूँ मैं जिन्हें अपना बनाया है 'अली ने शायर: शहबाज़ अली ना'त-ख़्वाँ: हम्माद काज़मी शहबाज़ क़मर फ़रीदी naseebo.n ko jagaaya hai 'ali ne hame.n apna banaaya hai 'ali ne wo tat.heere wo 'izzat betiyo.n ki bachaana KHud sikhaaya hai 'ali ne miTegi mustafa ki nasl kaise ki jab shajra chalaaya hai 'ali ne 'ali ke naam par ham kyu.n mare na hame.n jeena sikhaaya hai 'ali ne Gamo.n ne jab bhi mujh ko aa ke ghera mujhe aa kar bachaaya hai 'ali ne gada, Shahbaz ! un ke dar ka hu.n mai.n jinhe.n apna banaaya hai 'ali ne Poet: Shahbaz Ali Naat-Khwaan: Hammad Kazmi Sha...

दर पे बुलाओ मक्की मदनी | बिगड़ी बनाओ मक्की मदनी / Dar Pe Bulao Makki Madani | Bigdi Banao Makki Madani

दर पे बुलाओ, मक्की-मदनी ! बिगड़ी बनाओ, मक्की-मदनी ! दीद तेरी है 'ईद मेरी जल्वा दिखाओ, मक्की-मदनी ! महशर में हो लब पे मेरे मुझ को बचाओ, मक्की-मदनी ! सदक़ा अपने नवासों का दुखड़े मिटाओ, मक्की-मदनी ! बरसों से अखियाँ तरसीं जल्वा दिखाओ, मक्की-मदनी ! हम हैं गुनाहों में डूबे हुए जैसे हैं निभाओ, मक्की-मदनी ! सब्ज़-गुंबद के साए तले सब को सुलाओ, मक्की-मदनी ! कभी मिस्कीन की कुटिया में तशरीफ़ लाओ, मक्की-मदनी ! नय्या मँझधार में आन फँसी पार लगाओ, मक्की-मदनी ! लाज निभाना तुम्हें आता है लाज निभाओ, मक्की-मदनी ! तेरे बिन कौन हमारा है मदद को आओ, मक्की-मदनी ! दुख से, बला से, मुसीबत से जान छुड़ाओ, मक्की-मदनी ! आक़ा ! सरदार ग़ुलाम तेरा सीने से लगाओ, मक्की-मदनी ! शायर: मुहम्मद साबिर सरदार ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी राओ अर्सल - राओ ब्रदर्स मुहम्मद अमीन अत्तारी dar pe bulaao, makki-madani ! big.Di banaao, makki-madani ! deed teri hai 'eid meri jalwa dikhaao, makki-madani ! mehshar me.n ho lab pe mere mujh ko bachaao, makki-madani ! sadqa apne nawaaso...

मेरी झोली में रहते हैं सदा टुकड़े मुहम्मद के / Meri Jholi Mein Rehte Hain Sada Tukde Muhammad Ke | Meri Jholi Mein Rehte Hain Sada Tukre Muhammad Ke

मेरी झोली में रहते हैं सदा टुकड़े मुहम्मद के अज़ल से खा रहा है ये गदा टुकड़े मुहम्मद के पड़ी है क्या मुझे शाहों के दर से जा के मैं माँगू खिलाता है मुझे मेरा ख़ुदा टुकड़े मुहम्मद के मेरे रस्ते की हर मुश्किल गुज़र जाती है कतरा कर कि देते हैं मुझे मुश्किल-कुशा टुकड़े मुहम्मद के इन्हें खा कर अबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान बनते हैं ये रुत्बे में हैं कुछ ऐसे जुदा टुकड़े मुहम्मद के हैं शहर-ए-'इल्म ख़ुद आक़ा, 'अली हैं उस का दरवाज़ा तू दरवाज़े से आ और खाए जा टुकड़े मुहम्मद के अबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्माँ, 'अली इब्न-ए-अबी-तालिब लुटाते हैं ये दुनिया में सदा टुकड़े मुहम्मद के मेरे मौला ! 'अली-ओ-फ़ातिमा, हसनैन के सदक़े मेरी नस्लों को भी करना 'अता टुकड़े मुहम्मद के तेरा दामन कभी, अल्ताफ़ ! ख़ाली रह नहीं सकता कि देते हैं तुझे आल-ए-'अबा टुकड़े मुहम्मद के शायर: सय्यिद अल्ताफ़ शाह काज़मी ना'त-ख़्वाँ: हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरी शहबाज़ क़मर फ़रीदी meri jholi me.n rehte hai.n sada Tuk.De muhammad ke azal se khaa raha hai ye gada Tuk.De muhammad ke pa.Di hai kya mu...

ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता | मुहम्मद के ग़ुलामों का कफ़न मैला नहीं होता / Zameen Maili Nahin Hoti Zaman Maila Nahin Hota | Muhammad Ke Ghulamon Ka Kafan Maila Nahin Hota

ज़मीं मैली नहीं होती, ज़मन मैला नहीं होता मुहम्मद के ग़ुलामों का कफ़न मैला नहीं होता मोहब्बत कमली वाले से वो जज़्बा है सुनो, लोगो ! ये जिस मन में समा जाए, वो मन मैला नहीं होता मोहब्बत प्यारे आक़ा से वो जज़्बा है सुनो, लोगो ! ये जिस मन में समा जाए, वो मन मैला नहीं होता नबी के पाक लंगर पर जो पलते हैं कभी उन की ज़बाँ मैली नहीं होती, सुख़न मैला नहीं होता गुलों को चूम लेते हैं सहर नम शबनमी क़तरे नबी की ना'त सुन लें तो चमन मैला नहीं होता जो नाम-ए-मुस्तफ़ा चूमें, नहीं दुखती कभी आँखें पहन ले प्यार जो उन का, बदन मैला नहीं होता तिजोरी में जो रखा है सियाही आ ही जाती है बटे जो नाम पर उन के वो धन मैला नहीं होता नबी का दामन-ए-रह़मत पकड़ लो, ए जहाँ वालो ! रहे जब तक ये हाथों में, चलन मैला नहीं होता मैं नाज़ाँ तो नहीं फ़न पर मगर, नासिर ! ये दा'वा है सना-ए-मुस्तफ़ा करने से फ़न मैला नहीं होता शायर: सय्यिद नासिर हुसैन चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: शहबाज़ क़मर फ़रीदी हाफ़िज़ अहमद रज़ा क़ादरी ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी zamee.n maili nahi.n hoti, zaman maila nahi.n hota muhammad ke Gulaamo.n ka kafa...

अब मेरी निगाहों में जचता नहीं कोई / Ab Meri Nigaahon Mein Jachta Nahin Koi

अब मेरी निगाहों में जचता नहीं कोई जैसे मेरे सरकार हैं, ऐसा नहीं कोई तुम सा तो हसीं आँख ने देखा नहीं कोई ये शान-ए-लताफ़त है कि साया नहीं कोई ए ज़र्फ़-ए-नज़र ! देख मगर देख अदब से सरकार का जल्वा है, तमाशा नहीं कोई ये तूर से कहती है अभी तक शब-ए-मे'राज दीदार की ताक़त हो तो पर्दा नहीं कोई होता है जहाँ ज़िक्र, मुहम्मद के करम का उस बज़्म में महरूम-ए-तमन्ना नहीं कोई ए'ज़ाज़ ये हासिल है तो हासिल है ज़मीं को अफ़्लाक पे तो गुम्बद-ए-ख़ज़रा नहीं कोई दरमान-ए-ग़म-ओ-दर्द, शिफ़ा-ए-दिल-ए-बीमार जुज़ आप के, ए जान-ए-मसीहा ! नहीं कोई सरकार की रहमत ने मगर ख़ूब नवाज़ा ये सच है कि ख़ालिद सा निकम्मा नहीं कोई शायर: ख़ालिद महमूद ख़ालिद नात-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी मुहम्मद हस्सान रज़ा क़ादरी ab meri nigaaho.n me.n jachta nahi.n koi jaise mere sarkaar hai.n, aisa nahi.n koi tum sa to hasee.n aankh ne dekha nahi.n koi ye shaan-e-lataafat hai ki saaya nahi.n koi ai zarf-e-nazar ! dekh magar dekh adab se sarkaar ka jalwa hai, tamaasha nahi.n koi ye toor se kahti hai abhi tak shab-e-me'raaj de...

कर दे करम रब साइयां / Kar De Karam Rab Saiyan

कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां मेरी झोली भर दे मौला, मैं तेरे दर ते आइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां सदक़ा हसन हुसैन दा मौला झोली दे विच पा दे दर तों खाली कोई न जावे ऐसा करम कमा दे तैनूं वास्ता उस सोहणे दा जिंदियां तूं क़समा चाइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां बीमारां दी सोहणेया रब्बा दूर होवे बीमारी दे औलाद नरीना सब नूं दूर होवे लाचारी ज़हरा दा सदक़ा मौला अज सब दियां होण भलाइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां अल्लाह अल्लाह कर दे कर दे जान निकल जाए मेरी आख़र वक़्त ईमान जे देवे रब्बा रहमत तेरी तेरे नूर दा सदक़ा मौला अज दिल दियां होण सफाइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां बिछड़े होए मेल दे लाए टूटे दिल तूं जोड़े साढ़े जए बदकारां नूं वी सीधे रस्ते मोड़े रेहमान करीमा मौला सब तेरियां बे-परवाइयां कर दे करम रब साइयां, कर दे करम रब साइयां कर ...